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शादी के फैसलों पर सिकल सेल एनीमिया का असर: 17 राज्यों के 16 लाख लोग प्रभावित

  शादी के फैसलों पर सिकल सेल एनीमिया का असर: 17 राज्यों के 16 लाख लोग प्रभावित: राजनांदगांव :  शादी एक महत्वपूर्ण सामाजिक और व्यक्तिगत निर्ण...

 शादी के फैसलों पर सिकल सेल एनीमिया का असर: 17 राज्यों के 16 लाख लोग प्रभावित:

राजनांदगांव : शादी एक महत्वपूर्ण सामाजिक और व्यक्तिगत निर्णय होता है, लेकिन जब स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं इसमें भूमिका निभाने लगती हैं, तो यह एक गंभीर समस्या बन जाती है। देश में सिकल सेल एनीमिया के बढ़ते मामलों ने कई परिवारों को शादी के फैसलों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। खासकर मध्य प्रदेश समेत 17 राज्यों में यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है।

सिकल सेल एनीमिया: शादी के फैसलों में बाधा भारत में सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चल रहा है। इस बीमारी की पहचान के लिए अब तक 7 करोड़ लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 5 करोड़ लोगों की रिपोर्ट आ चुकी है। जांच के नतीजे चौंकाने वाले हैं—16 लाख लोगों में सिकल सेल एनीमिया या इसके लक्षण पाए गए हैं। खासकर आदिवासी इलाकों में यह बीमारी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है, जिससे विवाह को लेकर गंभीर दुविधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

बढ़ रही सामाजिक चुनौतियां सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित परिवारों के लिए शादी एक बड़ी चुनौती बन गई है। कई मामलों में ग्रेजुएट लड़कियों को योग्य वर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उन्हें मजबूरी में कम पढ़े-लिखे या मजदूरी करने वाले लड़कों से विवाह करना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित 17 राज्यों में यह समस्या तेजी से उभर रही है। परंपरागत रूप से समान सामाजिक और आर्थिक स्तर पर शादी करने की प्रवृत्ति रही है, लेकिन अब परिवारों को विवाह से पहले मेडिकल रिपोर्ट देखने की आवश्यकता पड़ रही है।

सरकार की ओर से प्रयास भारत सरकार और राज्य सरकारें इस समस्या को लेकर गंभीर हैं। सिकल सेल एनीमिया के मामलों की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही, विवाह से पहले इस बीमारी की जांच को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि भविष्य में बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।

विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का मानना है कि सिकल सेल एनीमिया से बचाव के लिए विवाह से पहले हेल्थ स्क्रीनिंग अनिवार्य की जानी चाहिए। डॉ. आर. शर्मा, एक वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट, का कहना है कि "अगर दोनों पार्टनर में सिकल सेल जीन पाया जाता है, तो उनके बच्चों में इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए विवाह से पहले यह जांच करवाना बेहद जरूरी है।"

समाज को आगे आना होगा यह समय है कि समाज भी इस समस्या को गंभीरता से ले और विवाह से पहले सिकल सेल एनीमिया की जांच को एक अनिवार्य प्रक्रिया बनाए। सही जानकारी और जागरूकता से इस बीमारी के दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।

निष्कर्ष सिकल सेल एनीमिया सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। यदि इस दिशा में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और विकराल हो सकती है। सरकार, समाज और व्यक्तिगत स्तर पर सजगता और जागरूकता ही इसका एकमात्र समाधान है।





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